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Thursday, January 30, 2014

विकास पथ पर निरन्तर गतिमान * अन्नपूर्णा सेवा संस्थान


वन्दे वाणी विनायकौ * सेवा लक्ष्य परम * वन्दे मातरम् ।।
वर्ष 2014ई .में अन्नपूर्णा साहित्य संगम सीतापुर के प्रथम वार्षिकोत्सव अवसर पर साहित्य अनुरागी  प्रेरक जन का
सतत अभिनन्दन ।वर्ष 1993ई.में पूजनीया माता श्रीमती आशा देवी -पूज्यपिता श्री शंभू दयाल द्विवेदी जी के शुभाशीष की छाँव में पाँव पाँव सफलता सोपान चढ़ते विश्व पटल पर
उपलब्धियों के शिखर से कुछ कदम दूर , अन्नपूर्णा सेवा संस्थान की साहित्यिक सेवा
भावना का सुफल ,अन्नपूर्णा साहित्य संगम के
दूसरे वर्ष के द्वार पर पधारने ,आपके उत्साहवर्धन के
लिए संस्थान-संगम मन कर्म वचन से आभारी है संस्थान द्वारा जनपद,प्रदेश, के ही नहीं वरन उत्तराँचल के भी विद्यार्थियों को वर्षपर्यन्त सम्पन्न करायी जाने
वाली प्रतियोगिताओं में अलंकृत व पुरस्कृत
किया जाता रहा है ।प्रतिवर्ष प्राथमिक स्तर से महाविद्यालाय स्तर के 15से 20हज़ार विद्यार्थी
प्रतिभागी होते हैं । सांस्कृतिक , शैक्षिक एवं
क्रीड़ा की लगभग 135 प्रतियोगिताओं के वर्ष 2013 की प्रतियोगिताओं के पुरस्कार बितरण
सत्र , अन्नपूर्णा सेवा संस्थान के वार्षिकोत्सव
में दिनाँक 16.02.2014, 02 .03.2014 एवं -23 .03.2014ई. को आप सहृदयता पूर्वक पधार कर अनुग्रहीत करें ,संस्थान उत्साहवर्धन
के लिए सदैव आभारी रहेगा ।
संस्थान के आगामी उपक्रमों में चिकित्सा , विधि तथा वृक्षारोपण के हित में विशेष कार्य
योजना समेत एक शोध पुस्तकालय के शुभारम्भ के लिए प्रयत्नशील अन्नपूर्णा सेवा संस्थान -
अन्नपूर्णा साहित्य संगम द्वारा समायोजित दो दिवसीय साहित्यिक उत्सव एवं सायं6बजे से
कवि संगम की रसधारा में रस पान हेतु सादर
आमंत्रित करते हुए संस्थान गौरवान्वित हो रहा है आप सभी का ह्रदय से वन्दन अभिनन्दन ।
जय हिन्द वन्दे मातरम्

सदैव प्रगतिशील रहे सेवा अभियान ।
सहयोग के लिए कृतज्ञ अन्नपूर्णा सेवा संस्थान ।

Thursday, January 16, 2014

तनिक

तनिक बन ठन कर आओ पास ।
तनिक बन ठन कर आओ पास ।
विरह विदग्ध नयन उपवन घर
मुखरित हो मधुमास ।।   तनिक---
  शीतल मन्द पवन के झोंके
शुष्क कर रहे तट अधरों के ।
तपन रच रही तन तन तन पर
प्रणय गीत आठों पहरों के  ।।
अधर अधर पर दहक उठें प्रिय -
खिलते हुए  पलाश  ।। तनिक --
सज आये सन्ध्या सिन्दूरी
किलकारी भर रही मयूरी ।
कस्तूरी हो रही लालसा
आस मिलन की कब हो पूरी ।।
सम्भव नहीं अगर मर जाए -
प्यासी ही यह प्यास ।। तनिक ---
कहते बहते नीर चली आ ।
टेर रही यह पीर चली आ ।
लुट लुट घुट घुट जीते फिरते -
इस राँझे की हीर चली आ ।।
कर्म पन्थ पर रच दें मिल जुल
एक नया  इतिहास  ।।  तनिक---
गीत मिलन के गाये धड़कन ।
कब से प्रिये बुलाये धड़कन ?
पल दो पल क्षणभंगुर जीवन -
जाने कब थम जाए धड़कन ?
साँस साँस भर चलें चार पग -
सत्य सुखद सहवास  ।। तनिक -
आ साकार करें वे सपने ।
जिनको रहे लूटते अपने ।
लथ पथ नित्य अग्नि पथ चलते
अब जब पाँव लगे भी तपने ।।
यत्न करें चिर प्यास तृप्ति का -
पा  जाये  आकाश   ।। 
तनिक बन ठन कर आओ पास ।।।

Tuesday, November 5, 2013

मंगलमय हो मंगल यान ************

वन्दनीय वैज्ञानिक दल जो नित्य सँवारें भारत मान  ।
वसुन्धरा से अन्तरिक्ष तक भारत वैभव का यश गान ।
व्यक्ति शून्य प्रक्षेपित मंगल ग्रह पथ बढ़ता मंगल यान । ।वर्षो युगों गीत गौरव के गायेगा यह हिन्दुस्तान       ।।

Saturday, June 15, 2013

अब समय उठें जागें --- मिलकर ------------

वहशी होवें जब अंधियारे
युद्ध झूँठ से सच जब हारे
अपना हो कोई दुत्कारे
बजा जंग के बस नक्कारे
बीता बिसार , गीता सी रण सर्जना करें मिलकर ।
अब समय उठें जागें , केहरि गर्जना करें मिलकर ।
रखवाले बहुत अँधेरों के , रोशनी नहीं आने देंगे,
सपनों के शत्रु लुटेरे घर तक खुशी नहीं आने देंगे,
पापी से प्यार , पाप की पर , भर्त्सना करें मिलकर ।
प्यासी आँखों ने भी देखा , धरती से मिलता नीलगगन,
ठिठुरते नगन तन मिले बहुत , देखे कितने तन जड़े नगन,
प्रभु ! दें समृद्धि , शक्ति सबको , प्रार्थना करें मिलकर ।
नर - नारायण अवतार , इसलिए नर हो जाते नारायण,
कथनी - करनी में रहे भेद , बस काम कथा का पारायण
दुष्कर्मों की , दुश्शासन की , वर्जना करें मिलकर ।
अब  समय , उठें जागें , केहरि गर्जना करें मिलकर ।।

Thursday, June 13, 2013

विष्णु ! तुम्हारी गन्दी गंगा

विष्णु कैसे क्षीरसागर बीच तुम सोते रहे ?
विष बना गंगा के जल को पाप हम धोते रहे।
धवल जल को मल बनाते और करते आचमन ।
हम भगीरथ ऐसे गंगा में भी जौ बोते रहे ।।
कैसे अत्याचार,भगिनी पर सहे,माँ लक्ष्मी ,
दो नयन गंगा के बहते रात दिन रोते रहे ।
दूर मैलापन हो धन सब स्वच्छता अभियान का,
हम हजम करते गए , नारे जवाँ होते रहे ।
भाँवरों में , गीत यश के , काँवरो में जो बसे ,
मैली माँ गंगा वो ,उड़ते हाथ से तोते रहे ।।
गंगा माँ , पर लाज माँ की भी बचा पाए कहाँ ?
माँ के हत्यारे हैं , न्यारे , हम , समय  खोते रहे।।

Friday, January 6, 2012

वर्ष  दो हज़ार ग्यारह बीत गया रे
वर्ष दो हज़ार बारह गीत नया रे
कल भूल जाएँ झूमें नाचें गायें हम I
जय हिंद जय हिन्द वन्दे मातरम् I
एक रहे एक हैं , रहें भी एक  हम i
जय हिन्द जय हिन्द वन्दे मातरम् //


बीता हुवा कल तो रुलाता रहा रे ,                        
सपनों के झूलों में झुलाता रहा रे ,
तंग करता ही रहा रोने न दिया -
आधे भूँखे प्यासे ये सुलाता रहा रे ,
कहे नहीं जाते बेशुमार ऐसे ग़म /
जय हिंद जय हिंद वन्दे मातरम् /

कवि हो कोई हो गीतकार देश का ,        
सुना भी न जाए सीत्कार देश का ,                                  
कविता गज़ल गीत छंद लेख में -
भरते रहे हैं चीत्कार  देश  का  ,
रखवाले ढाते ऐसे जुल्म-ओ -सितम /
 जय हिन्द जय हिन्द वन्दे मातरम्  /

रोज नयी जंग से सगाई  हो गयी
महँगी आज़ादी की लड़ाई हो गयी ,
मुख  के निवाले तो घोटाले ले गए
 मालदार बस महँगाई  हो गयी ,
गिरवीं हो जाए न तिरंगा परचम /
जय हिंद जय हिंद वन्दे मातरम् ll