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Sunday, April 5, 2015

आईला छू आ---

वादे नहीं राजा आजा कर कोशिशें
आज पूरी कर ले ज़रा तो ख्वाहिशें
ज़िन्दगी है खेल !खेल खेल खेल में
खेल ये अनोखा चोखा ई लू  ई  लू ।
शोला जैसी सोलह की ये गड्डी मेरी जान
जाना नहीं रह भी फिसड्डी मेरी जान
जान मेरी रहती जवानी चार दिन
थोड़ी देर खेल ले कबड्डी मेरी जान
खेल का मैदान ये बदन हू ब हू ।आईला छू ।
रेल चले टेसन से जैसे रुक रुक
जिस्म ये जवान देख ब्यूटीफुल लुक
गेम बड़ा लवली न कर शेम शेम
मार ले मैदान जीते बिन नहीं रुक
हाथ पाँव मार करना है तू तू तू ।।।आईला छू ।
खेल ये अगाड़ी से पिछाड़ी से भी खेल
पढ़ा लिखा खेले औ अनाड़ी सके खेल
देखते ही देखते हो जाए चैंपियन
राजा आ जा कोई भी खिलाड़ी सके खेल
सर चढ़ने दे आईला छू का जादू  ।आईला छू  

जान जब जाये*********

जान जब जाये कभी पास मेरी जान न हो ।
मौत आने का जिन्दगी कहीं गुमान न हो ।।
कोई नफ़रत न मुहब्बत रहे खयालों में---
साँस में आरती लब पर कोई अजान न हो ।
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दर्द का गीत आओ ऐसा भी गाया जाए  ।
दर्द सहकर भी ज़माने को हँसाया जाए ।
गीत वरदान ये वैभव है गुनगुनाना भी
जख्म ताज़ा हो या सालों का हो पुराना भी
घाव पर प्यार का मरहम ये लगाया जाए ।
दर्द सहकर भी +++++++++
आख़िरी सांस तलक प्यार की ये पीर चले
आँसू की शक्ल में ग़र पीर भरा तीर चले
अश्क़ नायाब खजाना न लुटाया जाए  ।
दर्द सहकर भी **********
दो नयन जिनमें पले ख्वाब की रानी हूँ मैं
ऐसा लगता है कि मीरा सी दीवानी हूँ मैं
आह इकतारा भी दिल का ये बजाया जाए ।
दर्द सहकर भी -----------
नींद आये न कभी हाय जो रजनी आये
आह हो कैसा जतन पहलू में सजनी आये
आये दम भर कभी वो रास रचाया जाये ।।
दर्द सहकर भी ज़माने को हँसाया जाए  ।।।

देखते और दर्पण रहे हम अगर ???????

देखते और दर्पण रहे हम अगर
देखते रूप ढल जायेगी चाँदनी ।
हार किरणों के जगमग सजा देह पर
भोर आकर निगल जायेगी चाँदनी ।
तेज रफ़्तार इतनी चले जिन्दगी
सांस या प्यास का क्या ठिकाना प्रिये ?
टूटकर कांच जैसा बिखर जाएगा
मत लगा चितवनों से निशाना प्रिये ।
कब बदल जाए भी बदलियों की नज़र
यह चमक लाये आये न कल चाँदनी ।
दृष्टि में नेह के मेघ उमड़े न यदि
व्यर्थ कितना उनींदे नयन आँज लो
तन का तिल तिल महकने लगेगी सुछवि
अंग पर प्यार का किरकिरा राँज लो
भाँज लो एक होने का मन से हुनर
हाथ !आयी , न जाये  निकल  चाँदनी ।

Tuesday, March 31, 2015

कुण्डलियाँ

सत्य प्राणघाती हुए राजनीति के लोग  ।
खोल कपाट विवेक के मत का करें प्रयोग ।।
मत का करें प्रयोग रहें तन मन से चंगे  ।1
चुनें न उनको जो फ़ितरत में कजोर लफंगे ।।
कविताई में युक्ति कहें वीरेन्द्र  तिवारी ।।।
शोषण नहीं करे पोषण सरकार हमारी ।।।

वंदन जन जन को नमन नेता सब बे ईमान ।
हैं कुपात्र पर हो गए भारत के भगवान  ।
भारत के भगवान यान से आते जाते ।
जनता से वीरेन्द्र शेष सच मत के नाते ।
किसी कुपात्री को अमृत मत दान न करना ।
उचित प्रयोग करो मत को कुर्बान न करना ।

आज़ादी में लीडरों ने दी निशि दिन चोट ।
रक्तबीज होते गए लूट लूट कर वोट ।
लूट लूट कर वोट नए करतब दिखलाते ।
पाँच वर्ष में जन अधिकार हजम कर जाते ।
व्यर्थ बन्दरों को वीरेन्द्र न देना  छूरा  ।
कपटी लीडर देश हजम कर लेंगे पूरा ।

मत के उचित प्रयोग का सब का हो अभियान ।
जन  मत से सम्पन्न हो सब विधि हिन्दुस्तान  ।
सब विधि हिन्दुस्तान मिटे सारी निर्धनता ।
विकसित हो सुख शान्ति पुष्ट हो ऐसे जनता ।
सच्चाई की राह चले सरकार हमारी ।
दुनियाँ गाये गीत रचे वीरेन्द्र  तिवारी ।।।

पण्डित मुल्ला हो कोई कुर्मी काछी जाट ।
वोट उसे कर दे खड़ी घोटालों की खाट ।
घोटालों की खाट बन्द हों  काले धन्धे ।
लोग गाँठ के पूरे रहें न हों पर अन्धे  ।
चलो उठें वीरेन्द्र उन्हें अब वोट करेंगे ।
चुनें उन्हें दें वचन न कोई खोट करेंगे  ।

वैभव रहे जयहिन्द

वैभव धरती प्यारी न्यारी कण कण में भगवान ।
कहीं आरती  तेरे  सदके  गूँजे  कहीं  अजान  ।
एक तमन्ना गीतों में हो तेरे यश का गान ।
तुझ पर हो कुर्बान जिस्म से जाए जब भी जान ।

वरदान दिव्य ऐसा रम्य रूप सलोना  ।
छवि कवि के ह्रदय कर गयी जादू कोई टोना ।
मर जाएँ तेरे प्यार में जब जब मिले जनम ।
वैभव रहे जय हिन्द मन्त्र वन्दे मातरम्  ।।।
सागर हसीन पाँव तेरे चूमता रहे
रखवाला हिमालय भी देख झूमता रहे
ऐसा है हुस्न चूमें फरिश्ते तेरे कदम ।। वैभव+
लहराए अंग अंग में यमुना तेरे गंगा
परियों सा रंग रूप ये परिधान तिरंगा
चाहेंगेतुझेजान से जबतक है दममेंदम।वैभव+
पी लेंगे हँस के तेरे लिए विष के भी प्याले
ले लेंगे जान जो बुरी नज़र कोई डाले
हमको कसम कलम की करें उसके सर कलम ।
सोने सा जिस्म नूर में तिलस्म है चाँदी
देखे जो नजर भर के नजर हो तेरी बाँदी
रग रग में मेरी धड़कनों में तू है माँ कसम ।
देखे बुरी नज़र से अगर कोई कमीना
आँखें निकाल छलनी करें शत्रु का सीना
कब खौफ लाख गोलियाँ चलें कि फटें बम।
कश्मीर जैसी चोली चुनर कन्याकुमारी
क्यों हुस्न पर फ़िदा न हो वीरेन्द्र तिवारी
जब जान जाए गाए सांस वन्दे मातरम् ।।।

परियों जैसा रूप

परियों जैसा रूप झूमते रेशम जैसे बाल
अंग अंग में बिजली चमके मस्त मोरनी चाल
अधरों पर अंगारे काले नयना कूलिंग फैन ।
आजा ज़रा मिला ले नैन धन्नो हम भी जेंटलमैन
भूतों जैसी सूरत देखो पिचके पिचके गाल
झींगुर जैसी काया कपड़ों में झलके कंकाल
धन्नो हेवन की शैम्पेन सॉरी मैं न मिलाऊँ नैन ।
आँखों से छलके अंगूरी बॉडी ब्रेड जैसे तन्दूरी
आजा मैं सपनों का राजा कर दूंगा रातें सिन्दूरी  आई लव यू कह भी आ मत जाए कोई विलेन ।
मैं हूँ लवली रेफ्रीजेटर तुझसे सुन्दर मेरे वेटर
स्वप्न सुन्दरी हो न सकेगा जोकर तू मेरा रेगुलेटर
प्यारा तुझसे ज्यादा घर जो नौकर धोये पैन ।
जाननहीं मैं बैडकरेक्टर करतेहैंसम्मान कलेक्टर
तार पुराने होनेसेक्या साँसों का मैं बेस्ट कनेक्टर
धड़ धड़ ह्रदय धड़कता उड़ता जैसे एरोप्लेन ।
झूमज़रा आमेरीहेलेन अभी चलासकताहूँ बेलन
कानपकड़करतौबाजायेंगेनकभीहमकविसम्मलेन सुपर कुकर हूँ किचेन संभालूँ नखरे ये दिन रैन ।
मुझे पता है तेरी हैबिट ढली एज में भी है रैबिट
कानखोल सुनले रे सूरा मेरे साथ न तू होगा फिट
लम्ब्रेटा  जैसा तू  मैं  जादुई  मारुती  वैन ।
कायाक्याकंकालबहुतहै अभीनसोंमेंमालबहुतहै
हिलजातेसुनते दिलसबके गीतोंमेंभूचाल बहुत है  रोम रोम झूमेगा मैं भी सिक्स एक्स रम कैन ।
सवा लाख की सिल्केन सारी
नस नस नवरस की किलकारी
मुझ पर चले न तेरा जादू
सुन इतना वीरेन्द्र तिवारी
सड़क छाप मजनू भी तुझ्से बढ़कर मेरे फैन ।
सॉरी मैं

माँ

वह माँ पिलाए दूध देके खून जो पाले ।
घुटकर अंधेरों में भी दे बच्चों को उजाले ।
बेशर्म बेटी बेटे वो माँ जिनकी जीते जी
मरती हो भूँख से न मिलें चार निवाले ।।

काँटों में सोये गोद में जो लाल सुलाये।
बाहों में भर ले चूमे झूमे झूले झुलाये
पापी पिशाच से बड़ा वो आदमी औरत
जो जीते जागते भी अपनी माँ  को रुलाये ।

यह ज़िन्दगी मिली जो बुनियाद तुम्हारी ।
तन्हाइयों में रोज आये याद तुम्हारी   ।
कब सोये चैन से गयी है दूर जबसे माँ -
ममता की प्यासी ही रही औलाद तुम्हारी ।।