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Thursday, December 1, 2011

हम तुम भी ---

वैरागी ! मन से बंजारे ,
आसमान से  टूटे तारे  ,
कह न सकें भी सूने ऐसे  -
हुए , भरे भण्डार हमारे  ,
जीना क्या घर के मधुवन के शूलों जैसे हैं !?
बहती सरिता की धारा के कूलों  जैसे  हैं   !!
ऐसी रच ली राम कहानी ,
चार दिनों बस चली जवानी ,
सोन चिरैया उड़ गयी फुर से -
आन हो गयी पानी-पानी ,
उड़े , हाथ आ , तोते ! टूटे  झूलों   जैसे   हैं  !!
ये पश्चिमी हवा के झोंके ,
उड़ा ले गए बसन घरों के ,
नंगेपन की अंधी आंधी -
सुख लूटे सहमी लहरों के ,
तूफानों से   तूलों में   मस्तूलों    जैसे    हैं   !!
सपने लुटते चोरी -चोरी ,
ऐसी बँधी प्रीति की डोरी ,
नींद हराम हो गयी फिर भी -
रात , सुनाती जाए  लोरी  ,
हम तुम भी  डाली  से बिछड़े  फूलों जैसे हैं   !!
जीना क्या घर के मधुवन के  शूलों जैसे हैं  !!


Wednesday, November 16, 2011

गली से गुजरे

वो  निगाहों में   लिए  जाम   गली से गुजरे /
हुस्नगर सज के सर-ए-शाम, गली से गुजरे /

ऐसे निकले , हो खिला झील में कमल जैसे ,
मस्त शायर  ने  कहीं  छेड़ दी  गजल जैसे ,
नीद ! रातों  में की  हराम , गली से गुजरे /
वो निगाहों में लिए जाम  ,  गली से गुजरे /

ख्वाब में यार ये अंगडाईयों के दौर तो हैं,
प्यासी बाहों में ये, परछाइयों के दौर तो हैं ,
रह गए यार ये दिल थाम,  गली से गुजरे /
वो  निगाहों में   लिए  जाम ,  गली से गुजरे /

दर्द दिल में नहीं कमतर भी कभी सपनों का ,
एक गम प्यार का शामिल है ये भी अपनों का ,
दर्द-ए - दिल , दे के वो तमाम, गली से गुजरे  /
वो  निगाहों में   लिए  जाम ,   गली से गुजरे /

यार बरसात में भीगी हुई लटों की कसम ,
रातों में आयें , सताएं जो  करवटों की कसम ,
नज़र से करते क़त्ल-ए - आम, गली से गुजरे /
वो  निगाहों में   लिए  जाम  ,  गली से गुजरे /

ऐसी हसरत से निगाहों की सरहदें देखीं,
लिपट के सायों से बाहों की सरहदें देखीं,
ऐसे कर देंगे वो बदनाम , गली से गुजरे /
वो  निगाहों में   लिए  जाम, गली से गुजरे /

Saturday, October 29, 2011

जो लिपट जाऊं

हम सफ़र कैसे अज़ब हैं मेरे साए  ऐसे !

ऐसे अपने हैं ,  रहें  दूर   पराये     जैसे !!

कदम कदम जनमजनम  ये उजालों में चले 
गुम ! अंधेरों में  हुए  कोई बताये कैसे !

फिर भी सीने से लगा लेने को मजबूर हूँ मैं 
और हर रात सितम सायों ने ढाए कैसे ?

जो लिपट जाऊं ,समा जाएँ जान-ओ-जिस्म में ये 
ऐसे गायब हों कभी घर नहीं आये  जैसे !                                   

कैसी   चाहत के ये दस्तूर निभाते रहते 
आग खुद ही लगाए कोई बुझाए  जैसे !jo

जिन्दगी भर का साथ छूटे न मरते दम तक 
,मेरे साए मेरी साँसों में समाये  ऐसे  !

Friday, October 28, 2011

श्रद्धांजलि

सूनी घाटी के सूरज  की  कीर्ति कथा अति न्यारी !

वरद लाल वाणी के भारत का जन मन बलिहारी !

विश्व पटल पर हिन्दी की नव व्यंग्य ध्वजा फहराकर ,

अमर हुए  श्रीलाल शुक्ल , रच  अमर  राग दरबारी!!

            सत्य धाम यात्रा पर करता नमन राष्ट्र यह सारा !
          श्रद्धा सुमन समर्पित पदतल कोटि प्रणाम हमारा !

























Thursday, October 20, 2011

जैसी करनी वैसी भरनी

वहशी हो कोई ,करनी जैसी वैसी ही भरनी भरता है !

वह क़त्ल करे छाए जितना ,कुत्ते की मौत ही मरता है !

हर सख्स खुदा का बन्दा है हर एक अगर यह याद रखे ,

इंसान वही जो मालिक को और मौत को याद भी करता है !


जैसी  करनी  वैसी  भरनी 

Saturday, October 15, 2011

प्रभु चन्द्र दें वरदान करूँ दिव्य आरती

  करवा चौथ के विश्वास व्रत के नाम नारियों का पैगाम =======

                  वो!  चाँद, अगर देख लेगा, मेरा  चन्द्रमा !
                 
                सोंचेगा प्रभु !मिली मुझे ये कैसी कालिमा !
           
                बन्धन ये प्यार का पिया से आर- पार का -

                भगवान्! नाथ! मैं हूँ, रमा जैसी प्रियतमा  !!

             वरदान  प्रभु   का नाथ ये विश्वास का बन्धन    !
            दीपक  ! नयन के नाथ ,व्रत ये आस का वन्दन  !!
             रखवाले , विनायक हैं सुख के , माता  भारती !
              प्रभु चन्द्र ! दें वरदान , करूँ दिव्य  आरती    !!!