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Monday, August 1, 2011

वो प्यार भी करते हैं तो?

वो प्यार भी करते हैं तो, छुपकर नक़ाब से.
इक़रार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से.
               उस रोज़ नज़र यार वो किस्मत से आ गए,
              सज कर संवर कर खुदा की कसम छत पर आ गए, 
दीदार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से 
वो प्यार भी करते हैं तो, छुपकर नक़ाब से. 
               आहों के घर से आये वो राहों में निकलकर,
               बाहों के दायरे से गए ऐसे फिसलकर .
ऐतबार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से 
वो प्यार भी करते हैं तो, छुपकर नक़ाब से.
             बेचैन शब-ओ-रोज़ करें ऐसे नज़ारे ,
             तन्हाइयों में वक्त कोई कैसे गुज़ारे ,
इज़हार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से 
वो प्यार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से.
            खुशुबू ! बदन की ऐसी हवाओं में भरी है 
           मस्ती! वो जानलेवा अदाओं में भरी है 
वो वार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से
इक़रार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से.
          दीवाना संग-ए-दिल  भी कोई हो, बहक उठे, 
          ऐसा है हुस्न हाय की गुलशन महक उठे,
गुलज़ार भी करते हैं तो छुपकर नक़ाब से 
वो प्यार भी करते हैं तो, छुपकर नक़ाब से.

2 comments:

Ankit pandey said...

बहुत सुन्दर, बहुत खूबसूरत भावाभिव्यक्ति .

virendra said...

Thanks