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Sunday, October 9, 2011

दिल की दीवारों पर मैंने

वह   कहते कविताई मैंने भोगा हुवा अतीत  लिखा  १

मन से हो न सके जो मेरे , उनको ही मनमीत लिखा 

जीवन की पीड़ा ने पहने जब स्वर व्यंजन के गहने ,

कहने लगी झूम कर दुनियाँ , दीवाने ने गीत लिखा ११

फिर       भी  ================


दिल की दीवारों पर, मैंने, प्यार का,  जब, पैगाम लिखा  ,

प्यास समन्दर जैसी पागल, सच बादल को जाम लिखा 

दिल की दिल में रही , कि तुझको लैला शीरीं हीर लिखूं -

जब कुछ भी लिखना चाहा , हर गीत ,तुम्हारे नाम लिखा 11''

          
     








2 comments:

वन्दना said...

बहुत सुन्दर भाव

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर ,

सार्थक प्रस्तुति , बधाई