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Wednesday, October 12, 2011

वृन्दावन में रस आँगन में =============



\वृन्दावन  में रस आँगन में , रस रास विलास, करें , भी  कभी !
!मधुवन जीवन ,इस जीवन में ,पल भर वनवासकरें भी  कभी !

         कण कण क्षण क्षण नव रस बरसे  
                           यदि प्यासे और नयन तरसे 
सचमुक्तिकहाँ जग बन्धनमें पर मुक्ति प्रयास करें भी कभी !

        सुख तो सुख है बस नाम का है 
                              सम्बल श्री राधे श्याम का है 
उद्गारों में , व्यवहारों में , प्रिय! में विश्वास  करें भी  कभी !

        दो पग कब साथ चले अपने 
                             वो  नयन लूटे जिनसे सपने 
उन अधरों और  स्वरों में भी स्नेहिल आभास, भरें भी कभी !

         पल -पल बीता जलते -जलते 
                            मन को छलते ,पथ पर चलते 
जलना जीवन दीपक से जलें ,हर ओर, प्रकाश  भरें भी कभी !

         वृन्दावन  में  मनमीत  मिलें 
                           रस में  डूबे  नव  गीत  मिलें 
मुरलीधर के गिरिवर धर के हित में उपवास करें भी कभी !
वृन्दावन में रस आँगन में रस रास बिलास करें भी कभी  !1
                            







4 comments:

Sunil Kumar said...

बहुत सुंदर भक्तिभाव से सजी रचना अच्छी लगी , बधाई

S.N SHUKLA said...

बहुत सुन्दर और सार्थक प्रस्तुति, बधाई

रविकर said...

बढ़िया प्रस्तुति |
हमारी बधाई स्वीकारें ||

neemnimbouri.blogspot.com

Kailash C Sharma said...

बहुत सुन्दर भक्तिपूर्ण अभिव्यक्ति..